

“एतदालंबनमं श्रेष्ठं, एतदालंबनमं परम; एतदालंबनमं ज्ञात्वा, ब्रह्म-लोके महीयते।” (कठोपनिषद: 1.2.17)
✡’यम’, मृत्यु के देवता, बालक नचिकेता के प्रश्न का उत्तर देते हैं, ‘ये (‘ॐ’) सर्वश्रेष्ठ आश्रय है, ये सर्वोच्च आश्रय है; इस आश्रय को जानकर, साधक, ‘ब्रह्म’ में महिमा प्राप्त करता है।’ अर्थात जो मरणशील (शरीर) है उसे स्वयं (आत्मा) से अलग देखकर, अभ्यास-कर्ता, मृत्यु-भय से मुक्त हो जाता है।
✡’Yam’, the god of death, answers the question of child Nachiketa, ‘This (OM) is the best support; this is the highest support; knowing this support, the practitioner is established in Brahm!’ That is, such a one knows the transient body different from the eternal Self and stands delivered from the fear of death!
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